नोएडा। नोएडा एक्सटेंशन में निर्माण को लेकर एनसीआर प्लानिंग बोर्ड की तरफ से लगी रोक हटने की संभावना बढ़ने के साथ ही कई बिल्डरों की नीयत डोलने लगी हैै। उन्होंने आवंटियों के फ्लैट कैंसल करने का खेल शुरू कर दिया है। इस समय बिल्डरों के कार्यालय भुगतान अटका होने की बात कहकर सैकड़ों फ्लैट कैंसल करने के लिए पत्र जारी कर रहे हैं। बताया जाता है कि बिल्डर इन फ्लैटों को नई बुकिंग के रूप में तीस से पचास फीसदी अधिक कीमत पर बेचने की फिराक में हैं।
वर्ष 2010 में नोएडा एक्सटेंशन के फ्लैटों की बुकिंग शुरू हुई तो इसके दाम करीब 1700 रुपये वर्ग फुट थे। बिल्डरों को यहां करीब 2 लाख 50 हजार फ्लैट बनाना थे। इनमें से लगभग सत्तर फीसदी फ्लैटों की बुकिंग तुरंत हो गई। 15 अप्रैल 2011 को शाहबेरी गांव का अधिग्रहण रद्द हुआ तो यहां पर फ्लैटों की कीमत 2200 रुपये वर्ग फुट तक पहुंच चुकी थी। कोर्ट से किसानों को बढ़ा मुआवजा देने का फैसला आने के बाद मामला एनसीआर प्लानिंग बोर्ड में फंसा है। मामले में अदालत का दरवाजा खटखटाने के बाद अदालत द्वारा बोर्ड से जवाब-तलब करने और राज्यसभा में मामला उठने के बाद बायर्स में फिर उम्मीद बनी तो बिल्डरों ने अपना दांव खेल दिया। बताया गया है कि पिछले चार-पांच दिनों में ही बिल्डरों ने सैकड़ों की संख्या में फ्लैट कैंसल करने के पत्र आवंटियों को जारी किए हैं।
ऐसा ही एक पत्र अरिहंत बिल्डर द्वारा सुनील कुमार तमराकर को जारी किया गया। इसमें ताज्जुब की बात यह है कि मात्र 29 सौ रुपये की देनदारी चुकता न करने की बात बताकर फ्लैट कैंसल कर दिया गया है। अमूमन किसी भी आवंटी द्वारा फ्लैट कैंसल कराने पर भुगतान में आनाकानी होती है, लेकिन सुनील को कैंसिलेशन पत्र के साथ बुकिंग के समय किए गए भुगतान 1,70,835 रुपये के रिफंड का चेक भी भेज दिया गया। सुनील के अनुसार उन्होंने अरिहंत आर्डर में फ्लैट बुक किया था और बुकिंग अमाउंट 1,66,547 का भुगतान किया था। इसके बाद बिल्डर की तरफ से टैक्स के रूप में 4288 रुपये की मांग हुई, उसका भी भुगतान किया गया। इसके बाद बिना किसी जानकारी के 2,933 रुपये का बकाया बताकर उनका फ्लैट कैंसल कर दिया गया।
इस मामले में सुनील से वार्ता के लिए अधिकृत अरिहंत के मार्केटिंग एक्जीक्यूटिव मोहित से कैंसिलेशन के मामले बढ़ने पर पूछा गया तो उन्होंने इसे प्रबंधन का निर्णय बताते हुए ज्यादा जानकारी से इनकार कर दिया। सुनील का मामला तो एक बानगी भर है, कई बिल्डरों मनमाफिक ब्याज की मांग कर रहे हैं आैर भुगतान न होने पर फ्लैट रद्द कर रहे हैं। कैंसिलेशन पत्र के साथ बिल्डर कार्यालयों पर लोग पहुंच रहे हैं। सुपरटेक सहित करीब एक दर्जन बिल्डरों द्वारा भी फ्लैटों को कैंसल करने की शिकायतेें लगातार पहुंच रही हैं।
प्रदर्शन में शामिल किया मुद्दा
पुराने आवंटियों से फायदा न फ्लैट कैंसल करने का दबाव बनाया जा रहा है। शिकायतें नेफोमा के पास आ चुकी हैं। 13 मई को जंतर-मंतर पर बायर्स द्वारा प्रदर्शन किया जाएगा। हमें बिल्डरों की मनमानी के खिलाफ आवाज उठानी होगी। -अभिषेक, नोएडा एक्सटेंशन फ्लैट्स ऑनर एंड मैंबर एसोसिएशन (नेफोमा) अध्यक्ष
महज तीन हजार रुपये का बकाया दिखाकर भी कैंसलेशन
अदालत पहुंचे आवंटी
जाहिर है नोएडा एक्सटेंशन का रास्ता साफ होने के बाद बढ़ी दरों पर नई बुकिंग होगी। ऐसी ही मंशा फ्लैट कैंसल करने वाले बिल्डरों को भी होगी। सुनील के मामले में बिल्डर 29 सौ रुपये पर ब्याज तो ले सकता है, लेकिन फ्लैट कैंसल नहीं कर सकता। -अनुपम श्रीवास्तव, रियल एस्टेट मामलों के वरिष्ठ अधिवक्ता।
दरअसल, अधिकांश बिल्डरों ने बायर्स को डाउन पेमेंट, फ्लैक्सी व कंस्ट्रक्शन लिंक प्लान भुगतान के लिए दिया है। डाउन पेमेंट में पूरा भुगतान एक बार में बिल्डर को मिलता है। फ्लैक्सी प्लान में किश्तें तय कर भुगतान किया जाता है, जबकि सीएलपी में निर्माण के अनुसार भुगतान करना होता है। नोएडा एक्सटेंशन में अधिकांश खरीदारों ने सीएलपी प्लान ही लिया है। डाउन पेमेंट को छोड़ दें तो निर्माण रुकने पर भुगतान प्राप्त करने का अधिकार बिल्डर नहीं रखता है। जानकारों के मुताबिक एग्रीमेंट में कई छुपी शर्तें होती हैं, जिससे बिल्डर भुगतान या ब्याज की मांग का आधार बना लेता है।
बीते हफ्ते मुख्तार अब्बास नकवी द्वारा एक्सटेंशन का मुद्दा राज्यसभा में उठाने के बाद इसके जल्द सुलझने के आसार बन गए हैं। इस मामले में शहरी विकास मंत्री कमलनाथ ने भी रिपोर्ट तलब की है। संभावना जताई जा रही है कि 17 मई तक एनसीआर प्लानिंग बोर्ड से निर्माण कार्य शुरू करने को हरी झंडी मिल सकती है। प्रदेश सरकार ने पहले ही मास्टर प्लान 2021 पर अपनी स्वीकृति दे दी है।
दो सप्ताह में मिल सकती है स्वीकृति
डाउन, फ्लैक्सी या सीएलपी
तक फ्लैटों के दाम बढ़ाने की फिराक में
बिल्डरों से बात करेंगे
फ्लैट कैंसल करने की शिकायतें मिल रही हैं। एक्सटेंशन में काम शुरू होता है तो भुगतान या ब्याज का मामला सही ठहराया जा सकता है, लेकिन अभी ऐसा नहीं है। पुराने बायर्स को लेकर क्रेडाई ने स्पष्ट कर दिया है कि उनके फ्लैटों की कीमत नहीं बढ़ेगी। -अनिल शर्मा, क्रेडाई एनसीआर के उपाध्यक्ष व आम्रपाली ग्रुप के एमडी
अतीत का आईना नोएडा एक्सटेंशन विवाद
•2007 में एक्सटेंशन के लिए गांवों का अधिग्रहण।
•2009-10 में इसकी आवंटन प्रक्रिया शुरू की गई।
•लगभग 2.50 लाख फ्लैट बनने थे यहां।
•6 लाख की आबादी आने वाले पांच साल में होती
•2031-मास्टर प्लान में 25 लाख आबादी का अनुमान।
•2010 से यहां ग्रुप हाउसिंग कंपनियों ने लांचिंग की।
•2010 जुलाई से दिसंबर, किसान कोर्ट पहुंचे।
•15 अप्रैल 2011 को हाईकोर्ट ने शाहबेरी गांव का अधिग्रहण रद्द किया।
•6 जुलाई को फैसले पर सुप्रीम कोर्ट की मुहर।
•19 जुलाईः हाईकोर्ट ने पतवाड़ी में 589 हेक्टेयर जमीन का आवंटन रद्द किया।
•धारा-चार व 17 के गलत उपयोग का आरोप।
•दो दर्जन बिल्डरों के ढाई दर्जन प्रोजेक्ट प्रभावित, करीब 60,000 फ्लैटों का निर्माण रुका।
•किसानों के पक्ष में फैसले आने से बायर्स प्रभावित।
•21 अक्तूबर 2011ः हाईकोर्ट ने 64 फीसदी बढ़ा मुआवजा देने का फैसला सुनाया।
•एनसीआर प्लानिंग बोर्ड ने मास्टर प्लान 2021 पर रोक लगाते हुए निर्माण कार्य रोकने का आदेश दिया।
Source-.indianrealtynews
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