Property Week

‘SEZ making property companies rich’
‎Chennai home resale market growing: HDFC
‎BMC to expose builders who con buyers
‎A second house can reduce your tax burden
‎Industries in Ghaziabad hope to get freehold status for their land
No hard landing in the home market
‎HSBC down-sizing office space in Coimbatore
‎SEZs turn into real estate zones‎ India Today
No full page real estate ads in newspapers over next 2 weekends!-MAH
India adds 1.94 million sq ft of new mall space in Jan-March quarter‎ Economic Times
Man Group plans to exist from real estate business
Realty projects scrapped, Shahberi farmers plans their own township
Realty players to protest against delays in grant of clearances
‎Ghaziabad Development Authority funds for Rithala Metro line
‎Noida Extension crisis takes toll on crane business
‎Explain Bisrakh acquisition: SC to UP govt
‎Projects suffer as Authority still headless- Noida
Mall rentals see 9-25% increase across high streets in India
KMP corridor in Haryana to have orbital rail, tech hubs
‎250 full-grown trees get new lease of life at DLF Golf Course


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ताकि घर मिलते ही बिजली रहे तैयार

दिल्ली-सहारनपुर हाउसिंग प्रोजेक्ट पर आवास विकास परिषद की तैयारी जोरों पर चल रही है। इस योजना के अंतर्गत तीन सब-स्टेशन बनाने की प्लानिंग की गई है। इन सब स्टेशन की क्षमता 33 केवीए की होगी। परिषद के विद्युत विभाग के अधिशासी अभियंता कृपाशंकर सिंह ने बताया कि योजना के अंतर्गत हजारों मकान बनाए जाने हैं। इसके लिए पर्याप्त बिजली की आवश्यकता पड़ेगी। इस देखते हुए तीन सब-स्टेशन की योजना बनाई गई है। एक सब स्टेशन बनाने मंे करीब 5 करोड़ रुपये की लागत आती है।

फिलहाल 4 हजार फ्लैट तैयार होने हैं

आवास विकास परिषद लोनी के नजदीक दिल्ली-सहारनपुर के नाम से हाउसिंग प्रोजेक्ट ला चुका है। यहां पर आसरा और सपना नाम से करीब 4 हजार फ्लैट्स तैयार किए जाने हैं। इसके अलावा 5 हजार और प्लैट्स लाने की तैयारी चल रही है। यहां तक कि करीब 2300 एकड़ वाली इस आवासीय योजना मंे कई मल्टीप्लेक्स, इंडोर स्टेडियम, हॉस्पिटल और कम्युनिटी हॉल शामिल हैं। इसे देखते हुए परिषद आने वाले करीब 20 साल तक इस स्कीम से करोड़ों रुपये की कमाई करेगा। इसी कड़ी मंे फिलहाल परिषद ने इस इलाके मंे तीन सब स्टेशन बनाने की योजना तैयार कर ली है। अधिशासी अभियंता का कहना है कि सब स्टेशन बनाने के काम में अभी वक्त लगेगा। चूंकि वहां पर फ्लैटों के निर्माण का काम शुरू नहीं हो पाया है। काम शुरू होने के बाद ही वहां आगे की तैयारी शुरू होगी।

ड्रॉ में लगेगा वक्त

परिषद के अधिकारियों का कहना है कि आसरा और सपना स्कीम के ड्रॉ में वक्त लगेगा। चूंकि इस समय फ्लैटों के निर्माण के लिए निकाले गए टेंडर को रद्द कर दिया गया है। इसलिए काम शुरू होने के बाद ही ड्रॉ की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। अधिकारियों ने बताया कि योजना में किसी तरह निर्माण से पहले ड्रॉ निकाले जाने पर समस्या खड़ी हो सकती है।

SOurce- Navbharat-Times

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Construction Status

Prateek Laurel – Sector 120, Noida

Hirco HPG Chennai Construction update video March 2012

http://www.youtube.com/watch?v=5q-ce6v50NI

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Raj Nagar Extension

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35 बिल्डर हो सकते हैं डिफॉल्टर

नोएडा
अगर आपने नोएडा में पिछले तीन साल के दौरान कोई फ्लैट किसी बिल्डर के यहां बुक कराया है या अभी बुक कराने की सोच रहे हैं, तो सावधान रहें। हो सकता है कि बिल्डर आपसे तो नियमित रूप से किस्तें ले रहा हो, लेकिन अथॉरिटी के खाते में वह रकम जमा ही नहीं करा रहा हो। ऐसे में जरूरी है कि आप अथॉरिटी ऑफिस में जाकर ऐसे बिल्डर का रेकॉर्ड चेक करें। अथॉरिटी के रेकॉर्ड में लगभग 35 से ज्यादा ऐसे बिल्डर हैं जिन पर अथॉरिटी का 5 हजार करोड़ से ज्यादा बकाया है। इनमें कई नामी बिल्डर भी हैं।

फरवरी में अथॉरिटी ने कुल 117 बिल्डरों की सूची तैयार की थी। इस सूची में शामिल 3 दर्जन बिल्डरों की तो फाइलें ही नदारद थीं। लगभग 30 के करीब बिल्डर ही ऐसे निकले जिन्होंने अपनी पेमेंट अपडेट कर रखी है। बाकी पर डिफॉल्टर घोषित होने का खतरा मंडरा रहा है। चुनाव आचार संहिता के चक्कर में अथॉरिटी अफसरों ने बिल्डरों को कोई नोटिस जारी नहीं किया। अब जैसे ही नए सीईओ जॉइन करेंगे डिफॉल्टर की कैटिगरी में आने वाले बिल्डरों को नोटिस जारी कर उनकी लीज डीड तक कैंसल की जा सकती है। ऐसे में आपका पैसा भी फंस सकता है।
2008 में आई थी स्कीम, अथॉरिटी ने खोला था रियायतों का पिटारा
2008 के बाद मंदी का हवाला देकर आई स्कीम में अथॉरिटी ने बिल्डरों के लिए राहतों का पिटारा खोल दिया था। न सिर्फ 10 पर्सेंट रकम लेकर प्लॉट की रजिस्ट्री कराई गई, बल्कि उन्हें 2 साल तक किस्त जमा न करने की छूट भी दी गई। इस दौरान बिल्डरों को सिर्फ ब्याज की रकम जमा कराने को कहा गया। बिल्डरों को प्लॉट में एफएआर और ग्राउंड कवरेज एरिया में भी छूट दी गई थी। यहीं नहीं अथॉरिटी ने बिल्डरों को 2005-06 के दौरान मुलायम राज में 28 हजार 800 रुपये प्रतिवर्ग मीटर की न्यूनतम बिड पर जमीन आवंटित की थी। तब एफएआर और ग्राउंड कवरेज भी कम था। 2009-10 में अथॉरिटी ने 20 हजार 800 रुपये प्रतिवर्ग मीटर की न्यूनतम रिजर्व प्राइस के आधार पर बिल्डरों को बड़े पैमाने पर जमीन आवंटित की। सेक्टर-75 में तो एक बिल्डर को 6 लाख वर्गमीटर जमीन 15 हजार 700 रुपये प्रतिवर्ग मीटर के आधार पर ही आवंटित कर दी गई। इस प्लॉट में 10 पर्सेंट कमर्शल था।

अब ज्यादातर हो रहे हैं डिफॉल्टर
अथॉरिटी के प्रशासनिक सूत्रों की मानें तो कई बिल्डर ऐसे हैं, जिन्होंने अथॉरिटी के अलॉटमेंट लेटर में दी गई शर्तों की जमकर धज्जियां उड़ाई। किसी ने ब्याज नहीं दिया तो किसी ने अपना नक्शा पास कराए बगैर ही फ्लैटों की बुकिंग शुरू कर दी। रजिस्ट्री कराने के बाद भी आवश्यक रकम जमा नहीं कराई। 2 साल का मॉरटोरियम पीरियड पूरा होने के बाद भी बैंकों ने किस्तें जमा नहीं कराई हैं। 5 हजार करोड़ बकाया होने की वजह से अथॉरिटी इन बिल्डरों का काम कभी भी रोक सकती है।

10 हजार फ्लैटों पर खतरा
5 हजार करोड़ बकाया होने की वजह से अथॉरिटी डिफॉल्टर बिल्डरों का काम कभी भी रोक सकती है। ऐसे बिल्डर जिन पर खतरा मंडरा रहा है, वे अपने प्रोजेक्ट सेक्टर-74, 75, 76, 77, 78, 92, 117, 118, 119, 121 और 137 में बना रहे हैं। इनमें करीब 10 हजार फ्लैट तो बनकर तैयार हो चुके हैं।

अफसरों से करा रहे हैं पेमेंट की री-शेड्यूल
2006 के दौरान नोएडा में जमीन खरीदने वाले 2 बिल्डरों ने अथॉरिटी को जमीन वापस कर दी थी। इसके बदले में नोएडा ने दोनों बिल्डरों को 3 सौ करोड़ रुपए वापस कर दिए थे। 2 बिल्डरों के अलावा जो बाकी बिल्डर बचे थे वे जमीन न मिलने के कारण अधर में अटक गए। उन बिल्डरों ने पब्लिक से फ्लैट की बुकिंग कर ली मगर अथॉरिटी ऐसे बिल्डरों को कब्जा भी नहीं दे सकी। ऐसे कई बिल्डर सेक्टर-112, 114,115, 116 में फंसे हैं। ऐसे बिल्डरों ने अपनी किस्तों को लेकर अथॉरिटी अफसरों से री-शेड्यूल करवा रहे हैं।

पब्लिक से पैसा लेकर खरीद रहे हैं नए प्लॉट
पब्लिक से फ्लैट की बुकिंग का पैसा लेकर बिल्डर उस पैसे को किसी दूसरे प्रोजेक्ट में लगा रहे हैं। बिल्डर दूसरे एरिया में जमीन खरीदकर अपना लैंड बैंक बढ़ा रहे हैं। इसके अलावा वे जब तक अथॉरिटी की पहली किस्त देंगे, तब तक पब्लिक से शत प्रतिशत रकम ले चुके होंगे।

क्या है मॉरटोरियम
अमूमन यह सुविधा ऐसे आर्थिक संकट के दौर में दी जाती है, जब भूकंप या बाढ़ से बिजनेस प्रभावित होता है। ऐसी स्थिति में पेमेंट की शेड्यूलिंग में छूट देने का प्रावधान होता है।

क्या कहते हैं अधिकारी
नोएडा अथॉरिटी के वित्त नियंत्रक, ए. सी. सिंह कहते हैं, अथॉरिटी ने शासन से मिली मॉरटोरियम की सुविधा के आधार पर 2 साल का ग्रेस पीरियड बिल्डरों को दिया था। इनमें से कुछेक बिल्डरों ने अपने पेमेंट प्लान को री-शेड्यूल करा लिया था। जिन बिल्डरों ने अपनी किस्तों को री-शेड्यूल करा लिया था, उन्हें डिफॉल्टर की सूची में नहीं डाला जा सकता। वहीं ऐसे बिल्डर, जिन्होंने समय पर पेमेंट नहीं किया है, उन्हें निश्चित रूप से डिफॉल्टर कहा जा सकता है। इस तरह के बिल्डरों को फाइनैंस डिपार्टमेंट ने डिमांड लेटर जारी किए हैं। बाकी का काम संबंधित विभाग का है।

नोएडा अथॉरिटी के डिप्टी सीईओ डी. के. सिंह का कहना है, ‘मैं इस बारे में पूरा ब्यौरा नहीं दे सकता। शैलेंद्र कैरे ही बिल्डरों को नोटिस देने का काम देखते हैं। वे ही इस बारे में कुछ जानकारी दे पाएंगे।’

_navbharat times

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